एमबीए-एमसीए डिस्टेंस एज्युकेशन में रजिस्ट्रेशन शुरू, 26 अगस्त तक बुलाए आवेदन

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  • May 8, 2023
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एमबीए-एमसीए डिस्टेंस एज्युकेशन में रजिस्ट्रेशन शुरू, 26 अगस्त तक बुलाए आवेदन

इंदौर ।   नौकरीपेशा आवेदकों के लिए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (देअविवि) ने डायरेक्टोरेट आफ डिस्टेंस एजुकेशन (डीडीई) से संचालित एमबीए-एमसीए में प्रवेश को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी। पाठ्यक्रम की दूसरी बैच में सोमवार से आवेदन के लिए उम्मीदवार रजिस्ट्रेशन कर सकते है। एमपी आनलाइन के माध्यम से इन्हें शैक्षणिक योग्यता संबंधित दस्तावेज भी अपलोड करना होंगे। 26 अगस्त तक आवेदन किए जा सकते है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर काउंसलिंग रखी जाएगी। 27 अगस्त को आवेदकों को दस्तावेज लेकर काउंसलिंग में पहुंचना होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दूरस्थ शिक्षा से जुड़े नियम और अवधि में दो साल पहले बदलाव कर दिया था। तीन वर्षीय यूजी और दो वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम को मंजूरी दी गई। साथ ही कोर्स पूरा करने के लिए सिर्फ अतिरिक्त दो वर्ष दिए जाएंगे। खासबात यह है कि यूजीसी ने सालभर में दो मर्तबा डिस्टेंस एजुकेशन पाठ्यक्रम में प्रवेश देने पर जोर दिया है। जनवरी और जुलाई में आवेदक पंजीयन करवा सकते है। डीडीई को पिछले साल एमबीए और एमसीए पाठ्यक्रम संचालित करने का रास्ता साफ हुआ। अभी तक दोनों पाठ्यक्रम में 200 विद्यार्थी है।

अधिकारियों के मुताबिक दो वर्षीय एमबीए-एमसीए को यूजीसी और एआइसीटीई से मान्यता मिल हुई है। एमबीए में एक हजार सीटें रखी है। जबकि 250 एमसीए की सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। एमबीए में मार्केटिंग, एचआर, फाइनेंस, एनर्जी मैनेजमेंट, बिजनेस एनालिसिस में कोर्स पूरा किया जा सकता है। विभाग के डायरेक्टर डा. प्रतोष बसंल के मुताबिक 26 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन किए जाएंगे। 27 अगस्त को काउंसलिंग होगी, जिसमें सीटें आवंटित होने के बाद कक्षाएं लगाई जाएगी।

फीस बढ़ाने पर जोर

विभाग से संचालित एमबीए कोर्स की फीस बढ़ाने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय को भेजा गया है। अभी 11 हजार रुपये सेमेस्टर फीस विद्यार्थियों से वसूली जाती है। विभाग ने 18 हजार रुपये फीस करने का प्रस्ताव फीस समित को भेजा है। विभाग ने तर्क दिया कि तीन वर्षीय एमबीए पाठ्यक्रम के दौरान फीस तय हुई थी। 11 हजार रुपये सेमेस्टर के हिसाब से पहले विभाग को तीन साल में 66 हजार रुपये मिलते थे, जबकि अब पाठ्यक्रम की अवधि दो साल हो चुकी है। इस हिसाब से विभाग को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

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